गांधी जयंती के दिन ही पैदा हुए थे लाल बहादुर

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नई दिल्ली। मंगलवार को देश ने राष्ट्रपति महात्मा गांधी को याद किया। लेकिन जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को ऐसा लगा कि देश भूल गया हो। प्रधान सेवक नरेंद्र भाई दामोदरदास मोदी ने भी उन्हें याद नहीं किया। देश के मीडिया तो भी ऐसा लगा कि शायद इस दिन महात्मा गांधी के जन्म दिन के अलावा और किसी का जन्म हो ही ना। 
लाल बहादुर शास्त्री को मुंशीजी के नाम से भी बुलाया जाता था। स्वतंत्रता की लड़ाई से लेकर देश को संकट से उबारने तक लाल बहादुर जी का योगदान अतुलनीय है। 2 अक्टूबर 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्में शास्त्री जी गांधी जी के विचारों से बेहद प्रभावित थे। उनके जीवन से जुड़े कई किस्सों में इसका इस गांधी विचारधारा का प्रभाव देखने को भी मिलता है। लाल बहादुर शास्त्री जाति से श्रीवास्तव थे। लेकिन उन्होने अपने नाम के साथ अपना उपनाम लगाना छोड़ दिया था क्योंकि वह जाति प्रथा के घोर विरोधी थे।
स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान शास्त्री जी करीब 9 साल तक जेल में रहे। असहयोग आंदोलन के दौरान वे पहली बार 17 साल की उम्र में जेल गए। बालिग न होने के कारण बाद में उन्होंने छोड़ दिया गया। लेकिन उन्होंने देश की स्वतंत्रला के लिए अपनी लड़ाई जारी रखी और सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए 1930 में ढाई साल के लिए जेल गए। इसके बाद 1940 और फिर 1941 से लेकर 1946 के बीच भी वह जेल में रहे है। इस तरह कुल नौ साल वह जेल में रहे।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा था। जेल में एक बार उनकी पत्नी मिलने के लिए पहुंची। वह किसी तरह दो आम छिपाकर उनके लिए लाई थीं। जैसे लाल बहादुर शास्त्री आम को देखते ही भड़क उठे और उनके खिलाफ धरना दिया। उनका तर्क था कैदियों को जेल के बाहर की चीज लाकर देना कानून के खिलाफ है। उनमें नैतिकता इस कदर भरी थी कि एक बार उन्हें बीमार बेटी से मिलने के लिए 15 दिन की पैरोल पर जेल से छोड़ा गया। इस दौरान बेटी की मौत के बाद भी शास्त्री जी अवधि पूरी होने से पहले ही जेल वापस आ गए। शास्त्रीजी ने अपनी शादी में दहेज लेने से इनकार कर दिया था। जब कई बार ससुर में इस पर जोर दिया तो कुछ मीटर खादी को बतौर दहेज स्वीकारा। 
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