पिता ने बढ़ाया हौसला तो बेटियों ने कर दिया कमाल

Rajkumar 9811424880

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 नोएडा। कहते है एक मां से अधिक स्नेह और पिता से अधिक हौसला अपने बच्चों को कोई नहीं दे सकता। यह साबित किया है पत्रकार बीके अवस्थी ने। श्री अवस्थी ने अपनी बेटियों का हौसला बढ़ाया तो उन्होंने कमाल कर दिया। आज इनकी दोनों बेटियां कामयाब है। वे अपने क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उनका करोडों का कारोबार है। 
बीके अवस्थी का जन्म फर्रुखाबाद में हुआ। एक सामान्य परिवार में जन्में श्री अवस्थी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा दीक्षा फरूर्खबाद से की। तालीम हासिल करने के बाद ये रोजगार की तलाश में दिल्ली आए। यहां उन्होने शुरूआत में मजदूरी की। इसके बाद अपना कारोबार किया। चूंकि करोबार का हुनर नहीं था इसलिए वे इसमें फिट नहीं बैठ पाए। इसके बाद वे पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए। समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा लेकर फर्रुखाबाद से नोएडा आए बीके अवस्थी पिछले लंबे समय से राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र के लिए संवाददाता के तौर पर काम कर रहे हैं। नोएडा के सेक्टर 40 में वे अपने परिवार के साथ रहते है। इनकी दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों को श्री अवस्थी ने बेटों की तरह पाला है। उन्होंने बेटियों को नोएडा में तालीम दी। बेहतर तालीम देने के बाद बेटियों ने अपना व्यवसाय करने का मन बनाया। कुछ साल पहले एक इवेंट कार्यक्रम करने के लिए दोनों बेटियों ने पहल की। नोएडा में एक विशेष नाइट का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम को कराने के लिए इनकी दोनों बेटियों ने कड़ी मेहनत की। लेकिन इंवेट करने वाली कंपनी ने ऐन वक्त पर उनका साथ छोड़ दिया। 
शहर में अपनी प्रतिष्ठा को बचाए रखने के लिए इस इवेंट को पूरा करने के लिए श्री अवस्थी ने अपनी बेटियों का हौसला कम नहीं किया बल्कि बढ़ाया। वे बताते है कि यदि एक बार साख चली जाए तो फिर वापिस नहीं आती। उन्होंने दस फीसदी प्रतिमाह की दर से कर्ज लिया। इस इवेंट को पूरा करने के लिए वे जो कुछ कर सकते थे उन्होने किया। इस इंवेट को संपन्न कराने के बाद जब हिसाब लगाया तो इसमें मुनाफे की बजाए चालीस लाख रूपए का नुकसान दर्ज हुआ। अब बारी थी कर्ज मुक्त होने की। इसके लिए बीके अवस्थी ने अपना घर गिरवी रख दिया। ग्रेटर नोएडा में 170 मीटर के प्लाट को बेचकर कर्ज मुक्त हुए। बेटियों को लगा कि उनके एक गल्त निर्णय ने पिता को भारी संकट में डाला है। इस तरह की परिस्थितियों में अक्सर पिता अपने बच्चों को डाटने का काम करते है। बीके अवस्थी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटियों को कहा कि यह 4000000 का घाटा तुम्हें अंदर से मजबूत करेगा। अब तुम ऐसा समझो कि तुमने लंदन से एमबीए की डिग्री 4000000 में हासिल कर ली है। इस हौसले के बाद एक पत्रकार की बेटियों ने घर में बैठने के बजाए घाटे को पूरा करने की ठानी। आज दोनों बेटियों का करोड़ों का कारोबार है। बेटियां उनका नाम रोशन कर रही हैं। दोनो बेटियों की शादी हो चुकी है। इनके पति भी इनका साथ दे रहे है। श्री अवस्थी कहते हैं कि बच्चों का हौसला बढ़ाना परिवार की जिम्मेदारी होता है। अपनी औलाद को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए परिजनों को प्रयास करना चाहिए। वे कहते हैं कि मैंने पिता का हक अदा किया है इसलिए मुझे सुकून है। सॉलिटेयर एक्सप्रेस डाट काम की टीम उनके जज्बे को सलाम करती है।
 
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यदि आपके अंदर लग्न कडी मेहनत और संर्पणभाव से काम करने का जज्बा है तो मेरा दावा है कि एक दिन आप सफल जरूर होंगे। बस आपका भरोसा अपने उपर कायम रहना चाहिए। 18 साल पहले जब पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा था तब ये पेशा मिशन था। लेकिन बदलते परिवेश में पत्रकारिता की मान्यताओं में तेजी से परिवर्तन हुआ है। समाचार पत्रों को पीछे धकेलकर इन दिनों न्यूज चैनल अधिक प्रभावी हो चले है। शायद यही वजह है कि मौजूदा परिवेशन में न्यूज चैनलों के साथ ही आनलाईन पोर्टल भी प्रभावी होने लगे है। एक सकारात्मक सोच के साथ सालिटेयर एक्सप्रेस आपके बीच। आपका राजकुमार

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